पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के मौजूदा माहौल को देखते हुए इस यात्रा का विशेष महत्व है।
इस यात्रा के जरिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही रक्षा सहयोग को बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा प्रमुख तौर पर होगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर यूएई के विदेश मंत्री और अन्य शीर्ष नेताओं से मुलाकात करेंगे।
इस यात्रा का मुख्य फोकस ऊर्जा सहयोग पर है। यूएई भारत का प्रमुख ऊर्जा साझेदार है। वर्ष 2024 में भारत ने यूएई से करीब 13.45 अरब डॉलर का कच्चा तेल आयात किया।
खाड़ी क्षेत्र से भारत की 45% से अधिक तेल आपूर्ति
यूएई भारत के कुल कच्चे तेल आयात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा (लगभग 10 फीसद) है और खाड़ी क्षेत्र से भारत की 45 प्रतिशत से अधिक तेल आपूर्ति होती है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण होर्मुज की खाड़ी से गुजरने वाली आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है, इसलिए जयशंकर ऊर्जा सुरक्षा और लंबी अवधि के सौदों पर जोर देंगे।
BIRENDRA SAINI